आयुर्वेद और योग के नैतिक और दार्शनिक पहलुओं को उपाध्याय जी के अंत्योदय और लोकहित के सिद्धांत से जोड़ा गया है। योग का नैतिक आधार ‘यम-नियम’ पर है जो व्यक्ति को अनुशासन, संयम और सदाचार की ओर प्रेरित करता है।…
नैतिकता एवं आयुर्वेद-योग का समन्वय


आयुर्वेद और योग के नैतिक और दार्शनिक पहलुओं को उपाध्याय जी के अंत्योदय और लोकहित के सिद्धांत से जोड़ा गया है। योग का नैतिक आधार ‘यम-नियम’ पर है जो व्यक्ति को अनुशासन, संयम और सदाचार की ओर प्रेरित करता है।…

“Lifestyle as Medicine: Therapeutic Practices” In both Ayurveda and contemporary medical science, daily habits (दैनिक चर्या) and mind–body harmony are recognized as powerful, preventive, and restorative therapeutic tools. Early to bed & early to rise Maintaining a circadian rhythm regulates…

The phrase “Vande Mataram” — meaning “I bow to thee, Mother” — was first written by Bankim Chandra Chattopadhyay in 1870, and later included in his famous Bengali novel Anandamath, published in 1882. The novel was set against the backdrop…

गुरु पर्व — गुरु नानक देव जी का प्रकाश उत्सव। यह हमें याद दिलाता है — “सेवा ही सबसे बड़ा साधन है, और संतुलित जीवन ही सच्चा धन।”

“From milk to manure — the cow has remained our eternal teacher of sustainability.” पंचगव्य – दूध, दही, घी, गोबर और गौमूत्र – न केवल भारतीय जीवन पद्धति का प्रतीक हैं, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि और संतुलन के स्तंभ भी हैं।…

नवरात्र केवल एक त्योहार नहीं है; यह हमारी संस्कृति में निहित नौ दिनों का एक स्वास्थ्य–उपवास शिविर है। यदि हम इन अनुष्ठानों को सजगता से निभाएँ और स्वास्थ्य–सचेत विकल्प अपनाएँ, तो हम इन नौ रातों से और भी हल्के, शांत…